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पोकर में ऑल-इन क्या है (Poker mein all-in kya hai)? नियम, साइड पॉट और कब करें
MyClubGG संपादकीय टीम 2 मिनट में पढ़ेंअपडेट:
सीधा जवाब
ऑल-इन (all-in) का मतलब है अपने बचे हुए सारे चिप्स बेट कर देना। ऑल-इन होने के बाद आपको हैंड से बाहर नहीं किया जा सकता, आप शोडाउन तक रहते हैं। अगर बाकी खिलाड़ी आगे बेट करते रहें, तो एक साइड पॉट बनता है जिसे आप नहीं जीत सकते।
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इस लेख में
ऑल-इन का मतलब
जब आप अपने सामने रखे सारे चिप्स बीच में डाल देते हैं, तो आप ऑल-इन (all-in) हैं। इसे "शोव (shove)", "जैम (jam)" या "पुश (push)" भी कहते हैं। नो-लिमिट (no-limit) होल्डम में आप अपनी बारी पर कभी भी ऑल-इन जा सकते हैं।
ऑल-इन के 3 ज़रूरी नियम
- आपको बाहर नहीं किया जा सकता। ऑल-इन होने के बाद आपको आगे कोई फैसला नहीं लेना पड़ता। आप शोडाउन तक हैंड में रहते हैं।
- आप उतना ही जीत सकते हैं जितना आपने डाला। हर विरोधी से आप उतने ही चिप्स जीत सकते हैं जितने आपने खुद डाले हैं।
- बाकी की बेटिंग साइड पॉट में जाती है। जो चिप्स आप मैच नहीं कर सकते, वो अलग पॉट में जाते हैं, जिसे सिर्फ बाकी खिलाड़ी जीत सकते हैं।
साइड पॉट का उदाहरण
खिलाड़ी A के पास सिर्फ 20 चिप्स हैं और वो ऑल-इन है। खिलाड़ी B और C दोनों 50-50 डालते हैं।
| पॉट | कैसे बना | कौन जीत सकता है |
|---|---|---|
| मेन पॉट (main pot) | 60 (तीनों से 20-20) | A, B या C |
| साइड पॉट (side pot) | 60 (B और C से 30-30) | सिर्फ B या C |
अगर A का हैंड सबसे अच्छा है, तो A मेन पॉट जीतता है, और साइड पॉट B और C में से बेहतर हैंड वाले को जाता है। अलग-अलग स्टैक वाले कई खिलाड़ी ऑल-इन हों तो कई साइड पॉट बन सकते हैं। परिभाषा: साइड पॉट।
ऑल-इन में इक्विटी ही सब कुछ है
जब सारे चिप्स अंदर चले जाते हैं, तो आगे कोई बेटिंग नहीं होती। फिर बस ये मायने रखता है कि किसकी इक्विटी (equity), यानी जीतने का हिस्सा, कितना है। कुछ मशहूर मुकाबले (प्रीफ्लॉप):
- ओवरपेयर बनाम अंडरपेयर (AA बनाम KK): करीब 82 / 18
- पेयर बनाम दो ओवरकार्ड (QQ बनाम सूटेड AK): करीब 54 / 46, ऑफसूट AK के खिलाफ 57 / 43
- दो ओवरकार्ड बनाम दो अंडरकार्ड (AK बनाम 87): करीब 62 / 38
- डॉमिनेटेड हैंड (AK बनाम AQ): करीब 74 / 26
अपना कोई भी मुकाबला पोकर ऑड्स कैलकुलेटर में चेक करें।
ऑल-इन कब करना समझदारी है
- छोटा स्टैक हो: टूर्नामेंट में करीब 10 बिग ब्लाइंड से कम होने पर प्रीफ्लॉप ऑल-इन करना, रेज़ करके फोल्ड करने से आमतौर पर बेहतर होता है। देखें पुश-फोल्ड स्ट्रैटेजी।
- बहुत मज़बूत हैंड हो और आप चाहते हैं कि विरोधी पूरे स्टैक के लिए कॉल करे।
- सेमी-ब्लफ (semi-bluff): मज़बूत ड्रॉ के साथ, जब विरोधी के फोल्ड करने का भी चांस हो और कॉल होने पर भी आपके जीतने का चांस बचा रहे।
ऑल-इन को कॉल कब करें
कॉल करने के लिए आमतौर पर ऑल-इन करने से ज़्यादा मज़बूत हैंड चाहिए। ऑल-इन करने वाले के पास फोल्ड करवाने का भी रास्ता होता है, कॉल करने वाले के पास नहीं। पॉट ऑड्स (pot odds) देखें: अगर आपकी इक्विटी कॉल के लिए ज़रूरी हिस्से से ज़्यादा है, तो कॉल ठीक है। टूर्नामेंट में इनाम के करीब होने पर और सावधान रहें।
शुरुआती लोगों की आम गलती
हर अच्छा दिखने वाला हैंड ऑल-इन लायक नहीं। गुस्से या झुंझलाहट में ऑल-इन करना टिल्ट (tilt) का साफ निशान है। ऐसे वक्त ब्रेक लें। परिभाषा और उदाहरण: ऑल-इन।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
पोकर में ऑल-इन का मतलब क्या है?
ऑल-इन का मतलब है अपने बचे हुए सारे चिप्स बेट कर देना। इसके बाद आप शोडाउन तक हैंड में रहते हैं।
ऑल-इन के बाद अगर दूसरे बेट करते रहें तो क्या होता है?
उनकी अतिरिक्त बेट एक साइड पॉट में जाती है, जिसे सिर्फ वही खिलाड़ी जीत सकते हैं। ऑल-इन खिलाड़ी सिर्फ मेन पॉट के लिए खेलता है।
All-in karne ke baad kya fold kar sakte hain?
नहीं, और ज़रूरत भी नहीं। ऑल-इन होने के बाद आपको आगे कोई फैसला नहीं लेना पड़ता और आपको हैंड से बाहर नहीं किया जा सकता।
AA बनाम KK ऑल-इन में कौन जीतता है?
प्रीफ्लॉप AA करीब 82 / 18 का फेवरेट है, यानी KK के जीतने का चांस भी करीब 18% रहता है।
टूर्नामेंट में ऑल-इन कब करें?
करीब 10 बिग ब्लाइंड से कम होने पर, अच्छी रेंज के साथ प्रीफ्लॉप ऑल-इन करना आमतौर पर रेज़ करके फोल्ड करने से बेहतर होता है।
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